Dusro ki Madad karne ka Fal Hindi Kahani

Dusro ki Madad karne ka Fal Hindi Kahani

दुसरो की मदद करने का फल हिंदी कहानी / नेकी का फल

Dusro ki Madad karne ka Fal Hindi Kahani – एक गांव में परी नाम एक लड़की रहती थी जिसका इस दुनिया में कोई नहीं था वह बहुत सूंदर थी वह गांव वालो के कपडे धो कर अपना गुजरा करती थी। वह दिन भर इधर – उधर काम करती थी और शाम को अपनी झोपडी में आराम करती थी। बारिश का मौसम आया अधिक बारिश होने के कारन वह गांव वालो के कपडे लगातार २ दिनों तक नहीं धो पायी घर में भी कुछ खाने को नहीं था बारिश रुकने पर पारी पदोश में एक गांव में कपडे लेने के लिए गयी। और एक घर में उसने आवाज लगायी माँ जी क्या कुछ कपडे है धोने के लिए और उस घर से एक बूढी औरत निकली और बोली अरे परी आओ मैं तुम्हारा ही इंतिजार कर रही थी बारिश के कारन घर में बहुत कपडे धोने के लिए हो गए है पहले हमारे ही कपडे धो देना बाद में किसी दूसरे दे धोना।

तभी और लोग अपने घरो से कपडे लेकर परी की ओर आने लगे और सभी कहने लगे की हमरे कपडे पहले धोना। परी बोली हा हा मैं सबके कपडे समय पर दे दूंगी आप लोग परेशांन मत होइए बस कोई लोग मुझे थोड़ा सा खाना दे दीजिये २ दिन से मैंने कुछ नहीं खाया मुझे बहुत भूख लगी है। गांव वाले बोले अभी सुबह – सुबह तो कुछ नहीं बना है तुम कपडे धोना सुर्रू कर दो हममे से कोई न कोई तुम्हे खाना दे जायेगा। परी कपडे लेकर चली जाती है और कपडे धोना सुरु कर देती है लेकिन भूख और कमजोरी के कारन वह जायदा देर तक कपडे नहीं धो पाती है और आराम करने के लिए एक पेड़ के निचे बैठ जाती है। सुबह से शाम हो जाती है लेकिन गांव से कोई उसके लिए खाना लेकर नहीं आता है जैसे – तैसे करके वह कपडे धोती है और कपडे लेकर वह गांव पहुंच जाती है और बोली मैं इतने ही कपडे धो पाई भूख की वजह से मैं बाकि के कपडे नहीं धो पाई , बाकि कपडे मैं कल पंहुचा दूंगी। तभी उस गांव की एक रमा नाम की औरत बोली अरे परी को किसी ने खाना नहीं दिया मैंने सोचा किसी ने तो खाना दिया होगा 

सभी गांव के लोग यही बात एक दूसरे से कहने लगे। तभी परी बोली कोई बात नहीं मैं घर जाकर खाना खा लुंगी मुझे पैसे दे दीजिये। तो इस बात पे किसी ने उसे पैसे नहीं दिए सभी किसी न किसी बात का बहाना देकर मना करने लगे और यह कहकर सभी वह से निकल जाते है परी वह से उदाश होकर वह से निकल ही रही थी की तभी किसी ने उसे रोटी लाकर दी। वह रोटी लेकर अपनी झोपडी की तरफ चल दी जैसे ही वह झोपडी के पास पहुँचती है तो देखती है की उसके झोपडी के पास एक बूढी औरत गिरी पडी  है उसे देख कर बोली माँ कौन हो तुम तो बूढी औरत बोली बेटा मेरा इस दुनिया में कोई नहीं है मैं अकेली हु कल से कुछ नहीं खायी हु कमजोरी की वजह से गिर गयी हु।

Dusro ki Madad karne ka Fal Hindi Kahani

परी बोली ये लो माँ रोटी खा लो बूढी औरत ने रोटी खा ली। उसके बाद परी बोली माँ तुम यही रुक जाओ मेरा भी इस दुनिया में कोई नहीं हम दोनों एक दूसरे का ख्याल रख लेंगे,जो भी मिलेगा रुखा सूखा मिल बाट कर खा लेंगे मेरे पास एक ही पलंग है तम इस पर सो जाओ मैं निचे सो जाउंगी। बूढी औरत बोली सुक्रिया बेटी तो परी बोली तुमने हमें बेटी कहा है और माँ बेटी को सुक्रिया नहीं बोलती। बूढी औरत बोली बेटी तुमने कुछ खाया की नहीं तो परी बोली माँ मुझे भूख नहीं है मैं पानी पीकर सो जाउंगी तुम सो जाओ तुम परेशान मत हो।  जैसे ही परी जमीं पर लेटती है वैसे ही बारिश सुरु हो जाती है और झोपडी से पानी टपकने लगता है बूढी औरत के ऊपर पानी टपक देख परी एक बर्तन लेकर खड़ी हो जाती है ताकि उस बूढी औरत की नींद न ख़राब हो वह सारी रात खडी रहती है।

कुछ घंटो बाद बारिश रुक जाती है और परी सो जाती है तभी कुछ देर बाद दरवाजा खटखटाने की आवाज आती है परी उठकर दरवाजा खोलती है और देखती है की गांव वाले खड़े है वह उन्हें देख कर घबरा जाती है और कहती है अरे क्या हुआ मैं आज आप के कपडे धो दूंगी। तभी एक औरत बोलती है अरे नहीं परी हम तो तुम्हारा सुक्रिया अदा करने आये है तुमने हमारे कपडे इतने अच्छे धोवे मानो की अभी दुकान से खरीद के लाये गए हो। हम तुम्हे पैसे देने आये है सरे गांव वाले परी को पैसे देकर चले जाते है। परीघर के अंदर आती है तो देख कर हैरान हो जाती है घर एकदम नया था तरह -तरह के पकवान बने रखे हुए है बूढी औरत देख कर मुस्कुरा रही थी। परी बोली माँ ऐ सब क्या है तो बूढी औरत बोली बेटा पिछले हफ्ते ही मरी मौत हो गयी थी मेरा भी इस दुनिया में कोई नहीं था मैं भी अकेली थी

मेरी भी एक ख्वाइस थी की मेरी भी एक बेटी हो अधूरी ख्वाइस की वजह से मेरी आत्मा इधर – उधर भटक रही थी ,मैंने देखा की तुम एक नेक दिल की लड़की हो तुम्हारा भी इस दुनिया में कोई नहीं ,रात में मैंने तुम्हारी परीक्षा ली और तुम उस परीक्षा में खरी उत्तरी मुझे गर्व है की लक्ष्मी माँ ने तुम जैसी लड़की की माँ बनाया ,जब भी तुम्हे कोई परेशानी हो तुम मुझे याद करलेना। यह कहकर बूढी औरत वह से गायब हो गयी उस दिन से परी को जो चाहिए होता वह अपनी माँ को याद करती और वे दोनों बहुत बाते करते थे उस दिन से परी बहुत खुश थी।

इस कहानी से यह सीख मिलती है की हमें अपने दुःख को भूल कर दूसरे के दुःख को समझना चाहिए, यदि हम दुसरो के दुःख में किसी का साथ देंगे तो हमारा दुःख अपने आप ही ख़तम हो जायेगा। 

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