Jadui Hathoda ki Kahani

Jadui Hathoda ki Kahani

जादुई हथोडे की कहानी / चमत्कारी हथोड़ा

dui Hathoda ki Kahani – एक गांव में एक मेहनती लोहार रहता था उसका नाम राम गोपाल था वह दिन रात बहुत मेहनत करता था। रामगोपाल सभी प्रकार लोहे के औजार बनाता था। उसका छोटा सा एक परिवार था उसके परिवार में उसकी बीवी, एक बेटी और एक बेटा था ,एक दिन सुबह -सुबह वह अपनी पत्नी से बोला अरे सुनो जल्दी से कुछ रोटियां बना दो मैं बाजार जा रहा हु और सुनो मुझे आने में सायद कुछ रात हो जाये। रामगोपाल खाना पानी ले कर बाजार के लिए निकल पड़ा। बाजार का रास्ता एक घने जंगल से होकर गुजरता था कुछ दूर चलकर वह देखता है की एक पेड़ के निचे एक साधु भगवान् का जाप कर रहा है और जोर – जोर से हस भी रहा था ,रामगोपाल उनके पास गया और बोला बाबा जी क्या बात है …

आप इतना क्यों हस रहे हो इसपर बाबाजी बोले – अरे बेटा रामगोपाल आओ मैं तुम्हारा ही इंतिजार कर रहा था। यह सुनकर रामगोपाल चौक जाता है ,बाबा कहते है रामगोपाल क्या तुम अपने खाने में से मुझे कुछ खिला सकते हो मुझे बहुत भूख लगी है। रामगोपाल ख़ुशी से क्यों नहीं बाबाजी और रामगोपाल अपनी पोटली में से कुछ रोटियां निकल कर बाबाजी को खाने के लिए दे देता है ,कुछ देर बाद बाबा ने रामगोपाल से और रोटियां मांगी रामगोपाल ने अपने हिस्से की भी रोटियां बाबाजी को दे दी और बाबाजी से आशिर्बाद लेकर वह आगे बाजार के लिए निकल पड़ा। कुछ दूर चलने के पश्चात बाबाजी ने आवाज लगाई अरे वो रामगोपाल तुमने तो अपनी सारी रोटियां मुझे खिला दी अब तुम क्या खाओगे ,रामगोपाल बोला बाबाजी मेरी फ़िक्र मत कीजिये मैं बाजार की ओर ही जा रहा हु वह से किसी दुकान से कुछ न कुछ खरीद कर खा लूंगा। …

Jadui Hathoda ki Kahani Video

रामगोपाल की ऐसी बाते सुनकर बाबाजी खुश हो जाते है और रामगोपाल को एक हथोड़ा देते है और कहते है ये लो ये तुम्हारी बहुत मदद करेगा। यह देख कर रामगोपाल चौक जाता है और पूछता है की बाबाजी यह हथोड़ा मुझे क्यों दे रहे है बाबजी कहते क्युकी तुम मुझ जैसे फ़क़ीर पर दया दिखाकर एक अच्छे इंसान होने का परिचय दिया है ये हथोड़ा कोई मामूली हथोड़ा नहीं है यह बहुत ही चमत्कारी हथोड़ा है यह हथोड़ा मुझे मेरे गुरूजी ने दिया था और अब मैं ये तुम्हे दे रहा हु तुम इसे कभी गलत इस्तेमाल मत करना और तुम इसे कभी किसी गलत हाथो में मत पड़ने देना और यह कहकर बाबाजी गायब हो जाते है। रामगोपाल वह हथोड़ा लेकर बाजार की ओर निकल पड़ता है। …

अगले दिन रामगोपाल वह हथोड़ा लेकर अपनी दुकान में काम करने लगता है जब वह हथोड़ा किसी लोहे पर पड़ता तो वह लोहा किसी बर्तन में बदल जाता सभी खेती के औजार अपने आप ही तैयार हो जाते ये देख कर गांव के लोग आश्चर्यचकित हो जाते जिस किसी को भी जैसा औजार चाहिए होता वह हथोड़ा वैसा औजार तैयार कर देता था। रामगोपाल उस हथोड़े से बहुत खुस था उससे वह बहुत पइसे कमा रहा था। एक दिन रामगोपाल को गांव के मुखिया ने घर पर बुलाया और कहा रामगोपाल तुम जानते हो की गांव वालो को सहर जाने में दो दिन लग जाते है तुम्हारे पास तो जादुई हथोड़ा है क्या तुम उस पत्थर को तोड़ने में हमारी मदद करोगे गांव की खुसियाली क्या तुम ला सकते हो ,रामगोपाल बोला क्यों नहीं मुखिया जी मैं गांव वालो के लिए कुछ भी कर सकता हू ,मुखिया जी रामगोपाल को उस पर्वत के पास ले गए,रामगोपाल ने अपने जादुई हथोड़े को आदेश दिया -जाओ उस पर्वत के छोटे – छोटे टुकड़े कर दो ,हथोड़ा जाता है …Jadui Hathoda ki Kahani

और उस पर्वत के टुकड़े कर देता है। और अब सारे गांव वाले मिलकर वहा पर एक अच्छा रास्ता तैयार कर देते है। मुखिया जी ने रामगोपाल को सबासी दिया और बोला की तुम्हारी वजह से कितना मुश्किल काम पूरा हो गया पुरे गांव वालो को तुम पर नाज है। घर आकर रामगोपाल के मन में एक बात आती है और वह सोचता है की मेहनत का काम तो हथोड़े ने किया और जो सड़क बानी उससे तो गांव वालो का फायदा है तो इसमें मेरा क्या फायदा है। वह हताश होकर जंगल को ओर चलता है ओर थोड़ी दूर चलकर फिर से वही पर पेड़ के निचे वह बाबा मिलता है। रामगोपाल बाबाजी को पूरी कहानी बताता है उसके बाद बाबाजी रामगोपाल को हथोड़े की पूरी वास्तविकता बताते है की हथोड़े का उपयोग बल से नहीं बुध्दि से होता है वह रामगोपाल को बताते है की हथोड़े के एक नहीं अनेक फायदे है उसके बाद रामगोपाल समझता है की हथोड़े का उपयोग किस तरह करना है वह हथोड़े से सिर्फ खेती के हथियार नहीं बल्कि ओर भी चीज़े बनाने ओर तोड़ने में करने लगा। रामगोपाल यह सब करते करते एक बहुत बड़ा आमिर आदमी बन गया उसका यह सपना पूरा हो गया। इस कहानी से यह सीख मिलती है की हमरे पास जो चीज़े होती है हमें उनका मोल पहचानना होता है की किस चीज़ को कैसे प्रयोग करना है।  

Jadui Hathoda ki Kahani Video –

Jadui Hathoda ki Kahani

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *