Jadui Pathar ki kahani

Jadui Pathar ki kahani

जादुई पत्थर की कहानी / चमत्कारी पत्थर

Jadui Pathar ki kahani – एक गांव में गोपाल नाम का लड़का अपनी माँ के साथ रहता था वह पचपन से ही हर कम में कमजोर था। वह बचपन से जवान होने के बाद भी वह पहले की तरह ही कमजोर था। गांव के लोग उसकी इसी कमजोरी का फायदा उठाते थे खाश कर तब जब बगिया में आम और जामुन लग जाते थे। एक दिन वह अपने दोस्तों के साथ बगीचे में गया और उसके दोस्त बोले अरे गोपाल आम तोड़ने आया है या जामुन ,गोपाल बोला दोनों ,उसके दोस्त उसकी हसी उड़ाते हुए बोले एक तो टूटता नहीं दोनों तोड़ेगा ,गोपाल बोला माँ ने कहा है की दोनों तोड़ कर लाना ,उसके दोस्त कहते है तेरा निशान कभी लगा भी है की आज लगेगा ,मैं दिखता हू की निशान कैसे लगाते है ये देख। और उसके दोस्त ने अपने निशाने से एक आम गिरा दिया और उसे गोपाल ने उठा लिया तभी उसके दोस्त बोले ये मेरा आम है तू ऐसे नहीं ले सकता ..

गोपाल बोला ये मेरे पेड़ है इसे मैं ही लूंगा ,और उसके दोस्त उसे झगड़ कर आम ले लेते है। गोपाल घर आकर अपनी माँ से ये सब बताते है तो उसकी माँ उसे लेकर गांव के मुखिया से इस बात की शिकायत करती है मुखिया जी ने उसे इस बात से इंकार कर दिया की वो आम गोपाल का है अगर गोपाल को आम चाहिए तो उसे भी निशान लगाना शिखना होगा। गोपाल की माँ गुस्सा होकर वह से चली आयी और गोपाल अपने में को पुकारता रहा की सुनो माँ ,अब क्या सुनो इतना क्या काम सुना तेरे वजह से कहा न नहीं सुन्ना जा जाकर बगिया में निशाने लगाना शिख। माँ गुस्से से वह से चली जाती है और गोपाल माँ द्वारा फेकि हुई लकड़ी लेकर गांव की बगिया की और जाता है यह सोचते हुए की ये कम्बखत मेरा निशान क्यों नहीं लगता। रास्ते में उसे एक बाबा मिलते है तो वह देखता है की बाबा के सर पर एक साप है तो वह अपने निशाने से साप को गिरा देता है …

और बाबा से कहता है की बाबा यह साफ़ आपके सर पर था इसलिए मैंने इसे गिरा दिया ,इसपर बाबा कहते है तुमने बड़ी ही अचूक निशाने से मारा है ,गोपाल बोला इसी निशाने से तो मैं परेशांन हू बचपन से लेकर आज तक मेरा निशाना कही नहीं लगा पता नहीं यहा कैसे लग गया। मेरे गांव के लोग मेरे बगिया से आम तोड़ ले जाते है मैं नहीं तोड़ पाता क्यूंकि मेरा निशाना नहीं लगता और शिकायत करने पर मेरी माँ को बुरा भला भी सुनाते है। बाबा बोला तुमने मेरी जान बचाई है इसलिए मेरी नजर में तुम ही दुनिया के सबसे बड़े निशाने बाज हो लोगो की नजर में निशाने बाज बनने के लिए लो इस पत्थर से निशान लगाओ। गोपाल कहता की बाबा इतनी बड़ी लकड़ी से निशाना नहीं लगता तो इतने छोटे से पत्थर से क्या निशाना लगेगा। …

Jadui Pathar ki kahani

बाबा बोले ये आम पत्थर नहीं है बेटा ये जादुई पत्थर है इसे तुम जिस पर चाहोगे यह उसी पर जेक लगेगा फिर वो चाहे दुनिया के किसी भी कोने में न छुपा हो। फिर वह गोपाल पत्थर लेकर आम की बगिया में जाता है और कहता की सारे आम गिर जाये यह कह कर पत्थर फैकता और सारे आम गिर जाते। वो सारे आम और जामुन लेकर आ रहा होता है तभी उसे रास्ते में वो सारे आवारा लड़के उसे घेर लेते है और कहते है क्यों बे ये हमारे तोड़े हुए आम बिन कर ला रहा है ,गोपाल कहता नहीं मैंने खुद ही ये आम तोड़े है उनको इस बात का विश्वाश नहीं होता है और वो उसे फिर से निशाना लगाने को कहते है ,गोपाल गुस्से में आकर उन तीनो पर पत्थर से निशाना लगा कर उनका सर थोड़ देता है वो भाग जाते है। और वह सारे आम और जामुन अपनी माँ देता है तो उसकी माँ को यकीं नहीं आता है …

तभी मुखिया जी कुछ लठैतो को लेकर वहा आ जाते है और गोपाल को मरने का आदेश देते है तभी गोपाल को माँ कहती अरे रुको क्या किया है मेरे बेटे ने ,मुखिया जी कहते है की इसने मेरे बेटे और उनके दोस्तों का सर फोड़ दिया है ,नहीं नहीं ये कैसे फोड़ सकता ही ,मुखिया जी – अभी हम फोड़ के बताते है की कैसे फोड़ा ,उसकी माँ उनसे माफ़ी मांगती छोड़ दो मेरे बेटे को ,मुखिया जी – लठैतो देख क्या रहे हो इसका भी सर फोड़ दो ,गोपाल अपने उस पत्थर से उन सभी का सर फोड़ देता है। और इस घटना के बाद गोपाल को गांव में ठाढ़ बन जाती है और कोई भी गोपाल से लड़ने की हिम्मत नहीं रखता सब लोग गोपाल से डरते है। इसी दर की वजह से पुरा गांव उनसे बात करना छोड़ देता है। एक दिन उसकी माँ उसे समझती है गोपाल बेटे ये जादुई पत्थर फेक दे तू इसकी वजह से पूरा गांव हमें खिलाफ हो गया है कोई भी हमसे बात नहीं करना चाहता कोई हमसे रिस्ता नहीं रखना चाहता ,गोपाल बोला -पहले ही हमसे कोण रिस्ता रकना चाहता था ..

कम से कम गांव की औरते मेरे साथ उठती बैठती तो थी पर अब कोई बात तक नहीं करता ,गोपाल कहता ठीक है मैं इस पत्थर को फेक आता हू जैसे ही वह पत्थर फेकने के लिए बहार आता है तो देखता है की सारा गांव इधर – उधर भाग रहा है सारे लोग चिल्ला रहे है ,तभी एक गांव वाला कहता है की भागो टिड्डिया हमारे खेतो को तबाह कर देंगी तो हम खाएंगे क्या हम उन्हें मर भी तो नहीं सकते क्या करे मुखिया जी ,तभी गोपाल कहता किसी कुछ करने की जरुरत नहीं है मेरे रहते हमारे गांव की फसल बर्बाद नहीं होगी काका ,और वह पत्थर से कहता की सारी टिड्डियों को मार – मार के भगा दो इसतरह उस टिड्डयो से गोपाल गांव की सारी फसल बचा लेता है और सभी लोग गोपाल पर बहुत खुश होते है और मुखिया जी गोपाल को गांव के जवानो का मुखिया घोसित कर देते है और सभी लोग उसके साथ प्रेम से रहने लगते है।  

Jadui Pathar ki kahani Video –

https://youtu.be/C9W10WmxHs8?t=70

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