Jaise ko taisa hindi kahani

Jaise ko taisa hindi kahani

जैसे को तैसा हिंदी कहानी / जैसी करनी वैसी भरनी

Jaise ko taisa hindi kahani – एक बूढ़ा आदमी राजेश जो की अपनी पत्नी लता ,बेटे सुनील ओर बहु आशा के साथ शास्त्री नगर में रहता था। उसकी बहु आशा उनके साथ अच्छा बर्ताव नहीं करती थी। एक दिन लता बोली बहु मेरी ये छड़ी टूट गयी है चलने में बहुत परेशानी होती है तू सुनील से कह कर नई छड़ी दिलवा देना ,इसपर आशा बोली सासु माँ एक तो इतने खर्चे होते है ओर ऊपर से आप की ये छड़ी खरीदने जायेंगे तो एक डेढ़ हजार से तो काम में आएगी नहीं ,वैसे भी आप को कही आना जाना तो होता नहीं इस टूटी छड़ी से ही काम चला लीजिये इस टूटी हुई छड़ी की मरमत करवा देते है यह कह कर आशा वह से चली जाती है।..

वही पर लता के पति आ जाते है ओर वह कहते है – तुम क्यों छड़ी के लिए कहती हो इतने सालो में आशा ने हमारा सम्मान नहीं किया तो आज क्या करेगी। तभी वह पर उनका छोटा पोता रोहित वह आ जाता है और कहता है की दादी देखो मैं तुम्हारे लिए क्या लाया हू ,दादी कहती क्या बेटा ,रोहित आपकी छड़ी टूट गयी थी इसलिए मैं आप के लिए नई छड़ी लाया हू अब आप यह पुरानी छड़ी छोड़िये और नई छड़ी से चलिए। राजेश और लता एक दूसरे को देख कर मुस्कुराते है और मन ही मन यह सोचते है की कम से कम उनका पोता तो उनका सम्मान करता है। एक दिन सुनील अपने पिता के पास आता है और कहता है की पिता जी अपने पुराना वाला घर अभी तक क्यों रक्खा है हमें उसे अब बेच देना चाहिए….

अच्छे दाम मिल जायेंगे ,राजेश – मैं भी तो कितनी बार कह चूका हू मेरे जीते जी वो घर नहीं बिक सकता वो हमारा पुस्तैनी घर है ,सुनील -वो हो अब छोड़ भी दीजिये मोह माया कहा उस घर के पीछे पड़े है अब आप के पूजा पाठ के दिन है राजेश – घर का मोह नहीं है बेटा कुछ चंद यादे है उनका मोह है तुम नहीं समझोगे ,सुनील गुस्से से आप से तो बात करना ही बेकार है। राजेश और लता अपने बेटे और बहू के इस दुर्वव्हार से बहुत परेशांन थे उनके बेटे और बहू उनके साथ दुश्मनो जैसा वियवहार करते थे। एक दिन जब रोहित घर आता है तो देखता है की उसकी माँ आशा अपने सास को बहुत भला बुरा कह रही होती है आशा – आप दोनों ने तो हद कर रक्खी है बस रोज कुछ न कुछ मांग रहती है…

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लता -मैं तो सिर्फ ये कह रही थी की तेरे ससुर जी जो ठंढे पानी से नहाने में तकलीफ होती है इसलिए उनके लिए गरम पानी कर दिया कर अगर मेरे हाथ पाव चल रहे होते तो मैं ही कर देती तुझसे न कहती ,आशा -हाथ पाव तो आज भी चलते है आप के ये तो सब नाटक है आपका ताकि ये सारा काम मुझे ही करना पड़े। आशा वहा से चली जाती है ,रोहित अपनी दादी के साथ इतना दुर्व्यवहार देख कर गुस्से से पागल हो जाता है वो गुस्से में अपनी माँ के पास जाता है और बोलता है – माँ ये तुम किस तरह से दादी से बात करती हो ,आशा – अरे तुझे नहीं पता बेटा उनके तो तमाम तरह के नाटक रहते है तू ये सब छोड़ मुझे तुझसे एक बात करनी है वो भी खुसखबरी वाली ,कैसी खुसखबरी माँ ,अरे तेरे पिता जी ने अपने दोस्त की बेटी मेघा से तेरा रिस्ता तय कर दिया है…

रोहित – क्या माँ मेघा से मैं और मेघा तो एक सच्चे दोस्त है मैंने मेघा से सादी के बारे में कभी सोचा तक नहीं ,आशा – अरे नहीं सोचा तो अब सोच लेना। रोहित और मेघा बहार एक दूसरे से मिलते है और बाते कर रहे होते है ,रोहित – मेघा हमें पता है की हम दोनों की सादी होने वाली है पर मैं तुम्हे एक बात अभी से बता देना चाहता हू,मेघा – क्या रोहित ,यही की मेरी माँ एक अच्छी सास नहीं बनेगी क्यूंकि वो एक अच्छी बहू नहीं है। मेघा – पर रोहित मैं तो आंटी को बचपन से जानती हू वो तो बहुत अच्छे स्वभाब की है ,रोहित – वो स्वाभाव पता नहीं मेरे दादा और दादी के लिए नहीं दीखता उन्हें तो हरवक्त बुरा भला कहती रहती है। मैं चाहता हू की उनको पता चले की वो गलत कर रही है मैंने कुछ सोचा है मेघा क्या तुम इसमें मेरा साथ दोगी ,तुम जैसा कहोगी मैं वैसा ही करुँगी रोहित मैं तुम्हारे साथ हू।..

मेघा और रोहित की सादी हो जाती है और मेघा अब आशा की बहू बनकर घर आती है। आशा – बहू ये देख मैंने तेरे लिए ये हार बनवाया है ,मेघा – हू ये भी कोई हार है मैंने तो ये सोचा था की आ मुझे एक डैमोंड का हार देंगी पर ये क्या आप ने तो मुझे एक सस्ता हार पकड़ा दिया। आशा को ये सुनकर गुस्सा आ जाता है और वह मेघा पर बरस पड़ती है ,बहू -मैं तुम्हारी सास हू मुझसे तमीज़ से बात किया करो नहीं अच्छा नहीं होगा समझी ,मेघा -सासु माँ मैं भी आप की बहू हू आप भी मुझे ये धमकी मत दीजिये मेरे पिता जी भी वकील है अगर आप ने मुझपर कोई अत्याचार किया न तो एक ही बार में आप को अंदर करवा दूंगी ह। मेघा रोहित की तरफ देखकर मुस्कुराती है ,लता जी और रमेश देखते रह जाते है ,मेघा कैसे अपनी सास की गलतियों का उन्ही की भासा में उसे अहसास दिलाती है। इस कहानी से यह सीख मिलती है अगर आप किसी के साथ बुरा करते है तो आप ये जान लीजिये की आप के साथ भी आगे चलकर बुरा ही होगा इसलिए आप को किसी के साथ बुरा नहीं करना चाहिए।

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